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Wednesday, February 28, 2018


               राष्ट्रीय विज्ञान दिवस

   नई पीढ़ी के लिए विज्ञान शिक्षण 
कल्पना  के रंगों को पंख देता है विज्ञान
आदमी की सोच को विस्तार देता है विज्ञान
प्रगति के पथ को प्रशस्त करता है विज्ञान
जिन्दगी के रहस्यों  को अर्थ देता है विज्ञान
विज्ञान हमारे जीवन का एक सुंदर एवं अभिन्न  अंश बन गया है इसके बिना तो जैसे जीवन ही अधूरा है सुबह से लेकर रात होने तक ऐसी कितनी वस्तुओं का प्रयोग करते हैं जो विज्ञान ने हमें प्रदान की हैं विज्ञान ने हमारी जिंदगी को सुंदर व आसान बना दिया है
अभी भी कई अनसुलझे  रहस्यों पर पर्दा पड़ा हुआ है और इस तरफ बहुत प्रयास हो रहे हैं , यह अच्छी बात है आजकल कई बच्चे अपनी ओर से इस विषय की ओर रूचि दिखाते हैं, छोटी उम्र में भी कई कुछ खोज कर रहे हैं, परन्तु यह पर्याप्त नहीं है
विज्ञान को रुचिकर बनाना ही पहला कदम है विज्ञान को तो दिनचर्या की हर छोटी चीज से जोड़ा जा सकता है प्राथमिक कक्षाओं के शिक्षकों और छोटे बच्चों के अभिभावकों  पर इस बात की अधिक जिम्मेदारी है कि वे आने वाली पीढ़ी को इस की ओर आकर्षित करें
कक्षा नर्सरी से ही बच्चों में मौजूद जिज्ञासा  को बढ़ावा देना चाहिए, उन्हें अधिक से अधिक  बगीचे की सैर करानी चाहिय्रे उनके मन में उठने वाले प्रश्नों को डाट -डपट कर बंद नहीं कर देना चाहिए उन्हें रंगबिरंगी  किताबें देनी चाहिए जिनमें जीव जंतुओं के चित्र हों , राकेट हों, एस्ट्रोनॉट आदि हों कविताओं  एवं कहानियों के माध्यम से विज्ञान के सरल तथ्यों को बच्चों तक पहुचाना चाहिए
कक्षा तीसरी से पाचवीं तक आते- आते उन्हें कक्षा में हलके -फुल्के प्रयोग दिखाने की छूट देनी चाहिए जैसे कि उबले अंडों और कच्चे  अंडों को आप आसानी से कैसे बाहर से ही पहचान सकते हैं , अगर तीन गिलासों में  समान मात्रा में पानी  भरा हो ,तो हम उनमें अंडों को अलग अलग सतह पर कैसे रख सकते हैं, कौन सी वस्तुएँ  पानी में तैरेंगी, कौन सी डूबेंगी, कौन- सी वस्तुएँ  चुम्बक द्वारा आकर्षित होंगी , सात रंगों को हम सफ़ेद रंग में कैसे देख सकते हैं आदि छोटे छोटे कई रोचक प्रयोग हैं जिन्हें बिना किसी डर के बच्चे अपने स्तर पर कक्षा में दिखा सकते हैं ।घर पर भी अभिभावक ऐसे प्रयोगों को बढ़ावा  दे सकते हैं।
हर तथ्य को करके दिखाने की कक्षा होनी चाहिए किसी भी वस्तु को सूक्ष्मदर्शी  यन्त्र के नीचे रख कर देखने की छूट देनी चाहिए, जैसे विभिन्न प्रकार के कपड़ों के टुकड़ों को जब आप सूक्ष्मदर्शी  यन्त्र के द्वारा देखते हैं तो आप हैरानी से भर उठते हैं , कितने रोचक दिखतें हैं ये इसी प्रकार पक्षियों के पंख, फूलों की पंखुड़ियाँ आदि  किताबी ज्ञान से परे की दुनिया उन्हें दिखानी  चाहिए
कक्षा में कभी कभी  खोजों पर, वैज्ञानिकों पर, ग्रहों आदि अन्य विषयों पर चर्चा, प्रश्नोतरी आदि का आयोजन होना चाहिए कभी- कभी  समाचार पत्र में आये पर्यावरण संबंधी समस्यामूलक विषयों पर बातचीत करनी चाहिए
परीक्षा के प्रश्न रटंत विद्या पर आधारित न होकर उनकी नई सोच, उनकी सृजनात्मकता को बढ़ावा देने वाले होने चाहिए कुछ छोटी- छोटी  पुरानी चीजों को आपस में जोड़कर नया बनाने के  लिए प्रेरित करना  चाहिये  बेसिक किताबी  ज्ञान अवश्य होना चाहिए परन्तु प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा होनी चाहिए आज ऐसे विद्यालयों , ऐसे शिक्षकों ,  ऐसे अभिभावकों की आवश्यकता है जो विज्ञान जैसे सुंदर विषय को बोझिल न बनाएँ  बच्चा  इस विषय से डरें नहीं , कुछ नया कर दिखाने की  उसमें जहाँ हर दिन ललक हो
अभिभावकों को भी बच्चों के प्रश्नों से थकना नहीं चाहिए बल्कि उन्हें अपने बच्चों के साथ उनके उत्तर ढूँढने में मदद करनी चाहिए। बच्चों के साथ ढेरों बातें करें , उनके साथ  बैठकर विज्ञान संबंधी कार्यक्रम देखें । उन्हें ऐसी किताबें दिलाएँ जिनसे उनकी विज्ञान के प्रति रूचि जागृत हो।
उषा छाबड़ा




I am extremely thankful to Seth M.R. Jaipuria schools Banaras, for inviting me to their school as a guest speaker to share my experience on innovative teaching techniques and creating future champions of the society.It was really an enriching experience to meet so many teachers .








Tuesday, February 27, 2018

                             परीक्षा एवं समय नियोजन 

हर वर्ष कई बच्चे कक्षा दसवीं एवं बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में बैठते हैं। अकसर  यह देखा गया है कि आप  बच्चों में बहुत तनाव होता है। बच्चे  सारा पाठ्यक्रम पढ़ तो लेते हैं, परन्तु उन्हें  समझ नहीं आता कि पूरी तैयारी हो गई है कि  नहीं। एक तरफ बच्चे  किताबें तो खोल कर बैठे होते हैं पर पढ़ाई  में मन नहीं लगा पाते  , अपना आकलन स्वयं नहीं कर पाते कि अभी कितना और पढ़ना चाहिए , कितना  आराम करना चाहिए।  उधर मोबाइल पर फेस बुक ,  फोन कॉल और व्हाट्सएप्प पर भी  समय लग जाता है।  एक उलझन   की स्थिति रहती है , पढ़  भी रहे हैं, पर  संतुष्टि नहीं है। अभिभावक भी असमंजस में रहते हैं कि बच्चा क्या कर रहा है , ज़रा- सा उसे खाली देखते हैं तो कह उठते हैं , भाई खाली मत बैठो , कुछ पढ़ लो।

ऐसी स्थिति में समय नियोजन अति आवश्यक होता है।  अभी भी परीक्षा में कुछ समय है।  पूरे महीने का समय हम नियोजित कर सकते हैं  और उसी के आधार पर पढाई कर सकते हैं।
१  सबसे पहले हमें यह देखना है कि हमें पढ़ाई  के साथ- साथ थोड़ा आराम भी करना है,कुछ मनोरंजन के लिए भी समय देना है।
२ मान लीजिए हमें एक सप्ताह की समय सारिणी बनानी  है।  चूँकि  हम इन दिनों घर पर हैं , हमारे सारे काम हम अपने सोचे हुए ढंग से कर सकते हैं।
३  अपने उठने का समय निर्धारित करें।
४  हम उठ कर कितने  बजे पढ़ने बैठ सकते हैं , इसे निर्धारित करें।
५  अब कितनी देर के लिए टिक कर  बैठ सकते हैं- एक घंटा या डेढ़ घंटा या दो घंटा, उसे लिखें  ।
६  अब  उस समय किस विषय को आप पढ़ना  चाहते हैं , वह लिखें।
७ अब इसके बाद पूरे दिन में आप किस तरह बीच में आराम करना चाहते हैं , किस विषय को कितना पढ़ना चाहते हैं उसे तय करें।
८ अब अपने विषयों की तरफ देखें।  हर विषय में कितने पाठ हैं , हर पाठ को कितना समय देना है , यह तय करें।
९ अपने विषयों को अपने अनुसार समय दें।  जिस विषय में अधिक समय देना है , उसे टाइम टेबल में ज्यादा समय दें।
१० सभी पाठ पढ़ लेने के बाद  विभिन्न  विषयों का सैंपल पेपर करें।
११ धीरे- धीरे आपका आत्मविश्वास बढ़ता जाएगा। जो प्रश्न नहीं आते, फिर से उस  पाठ को धयान से पढ़ें एवं दुबारा प्रश्नों को हल करें।
१२  अपने खान -पान का पूरा ध्यान रखें। समय -समय पर उठकर टहलें एवं पानी पीएँ। पौष्टिक आहार लें।
१३  सहपाठियों की  न सुनें।  हर बच्चे का पढ़ने का ढंग अलग होता है।  आप  अपनी क्षमता के अनुसार पढ़ें। 


आपको अगर  कुछ समझ नहीं आ रहा, तो अभिभावक या किसी अन्य व्यक्ति से  मदद लें। अपनी बात कहने से न हिचकिचाएँ । परीक्षा स्वयं का आकलन  है , किसी और का नहीं।  आशा है  इस तरह समय सारिणी बनाने से आपको काफी लाभ पहुँचेगा। परीक्षा के लिए नियम बद्ध होकर पढ़ने से आत्मविश्वास बढ़ेगा और परीक्षा  से डर  भी नहीं लगेगा। 
उषा छाबड़ा



Saturday, February 17, 2018

Feeling delighted to share the pics of Book Fair , meeting friends and sharing the experience of writing the Tak Dhina Dhin . Thanks My Books Publications and Chauhan Saheb for giving this opportunity.




Watch my interview based  on Tak Dhina Dhin

https://www.youtube.com/watch?v=P39i7zf9OuQ&feature=share
You, yourself, as much as anybody in the entire universe, deserve your love and affection.
- BUDDHA

Feeling happy to share the pics of my session on 'Different shades of Love' at Oxford Bookstores. Heartful thanks to Rashmi Trivedi and Jayant Uppal for sharing their writings on love . 






Teachers Training

It was a great feeling to share my experience on different topics with the wonderful and enthusiastic staff of Seth M.R. Jaipuria School, Hardoi. 




Friday, February 16, 2018

January 2018
Teachers Training at SARD







 January 2018
Glimpse of my session with teachers  on Techniques of storytelling at CIET organised by Worldreader and SARD.








Theatre workshop with children of CEHRO . All the children were so active and receptive .It was really a fun filled session. 


प्रिय मित्रो 
आज आपके समक्ष एक और वीडिओ 'आ की मात्रा' का प्रयोग बनकर तैयार है। यह मेरे बड़े बेटे Piyush द्वारा बड़ी मेहनत से बनाया गया है। आशा है आप सबको पसंद आएगा। सभी इसे अधिक से अधिक शेयर करें ताकि बच्चों को इसका लाभ मिल सके। मेरे चैनल ushachhabra channel को subscribe करें।

https://www.youtube.com/watch?v=noyLsYg9M68&t=8s


 हस्तलेख से संबंधित वीडियो साझा कर रही हूं।आशा है आप सबको पसंद आएगा।

https://www.youtube.com/watch?v=V98_bBoPxoY&t=24s



मेरे द्वारा लिखी कहानी  'खूब मज़े करेंगे '

 https://youtu.be/QheZCronEi4


मेरे द्वारा लिखी कहानी  'वापसी '
https://www.youtube.com/watch?v=tOGE8gaHr30&t=4s
Stories .. stories ..... in the air!
Great Time spent at NDCHRC with children and adults at Vasant Kunj . Thank you Mr. Pratyush Kumar for the support .




November 2017
The theme of the Annual Day Production of D.P.S.Rohini was दिल्ली तारीख  के आइने में।
The script was written by me and children were trained accordingly. Very nicely presented by children.